Tuesday, December 31, 2019

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

                                 

                          प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

  • मुद्रा योजना में लोन लेने का यह है आसान तरीका

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की खास बात यह है कि इसके तहत लोन लेने वाले चार लोगों में से तीन महिलाएं हैं.
  • केंद्र सरकार ने छोटे उद्यम शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) शुरू की है. इसके तहत लोगों को अपना उद्यम (कारोबार) शुरू करने के लिए छोटी रकम का लोन दिया जाता है. यह योजना अप्रैल 2015 में शुरू हुई थी.
  • सरकार की सोच यह है कि आसानी से लोन मिलने पर बड़े पैमाने पर लोग स्वरोजगार के लिए प्रेरित होंगे. इससे बड़ी संख्या में रोजगार के मौके भी बनेंगे. मुद्रा योजना से पहले तक छोटे उद्यम के लिए बैंक से लोन लेने में काफी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थीं. लोन लेने के लिए गारंटी भी देनी पड़ती थी. इस वजह से कई लोग उद्यम तो शुरू करना चाहते थे, लेकिन बैंक से लोन लेने से कतराते थे.
  • क्या हैं प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लाभ? 

  • मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी के लोन मिलता है. इसके अलावा लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है. मुद्रा योजना में लोन चुकाने की अवधि को 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है. लोन लेने वाले को एक मुद्रा कार्ड मिलता है, जिसकी मदद से कारोबारी जरूरत पर आने वाला खर्च किया जा सकता है.
  • कौन ले सकता है मुद्रा योजना के तहत लोन? 
  • कोई भी व्यक्ति जो अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है, वह इस योजना के तहत लोन ले सकता है. अगर आप मौजूदा कारोबार को आगे बढ़ाना चाहते हैं और उसके लिए पैसे की जरूरत है तो आप प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक के लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं.

  • क्या है मुद्रा योजना का मकसद? 
  • केंद्र सरकार की मुद्रा योजना के दो उद्देश्य हैं. पहला, स्वरोजगार के लिए आसानी से लोन देना. दूसरा, छोटे उद्यमों के जरिए रोजगार का सृजन करना. अगर आप भी अपना कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी की समस्या का सामना कर रहे हैं तो केंद्र सरकार की इस पहल से आप अपने सपने को साकार कर सकते हैं.


  • मुद्रा बैंक के तहत प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के हस्तक्षेप के तहत इसमें तीन श्रेणीयां है -शिशु ,किशोर और तरुण। ये तीनों श्रेणीयां लाभार्थियों को विकास और वृद्धि में मदद करेगी।मुद्रा बैंक के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैः
  • 1. सूक्ष्म वित्त के ऋणदाता और कर्जगृहिता का नियमन और सूक्ष्म वित्त प्रणाली में नियमन और समावेशी भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए उसे स्थायित्व प्रदान करना।
  • 2. सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (एमएफआई) और छोटे व्यापारियों, रिटेलर्स, स्वसहायता समूहों और व्यक्तियों को उधार देने वाली एजेंसियों को वित्त एवं उधार गतिविधियों में सहयोग देना।
  • 3. सभी एमएफआई को रजिस्टर करना और पहली बार प्रदर्शन के स्तर (परफॉर्मंस रेटिंग) और अधिमान्यता की प्रणाली शुरू करना। इससे कर्ज लेने से पहले आकलन और उस एमएफआई तक पहुंचने में मदद मिलेगी, जो उनकी जरूरतों को पूरी करते हो और जिसका पुराना रिकॉर्ड सबसे ज्यादा संतोषजनक है। इससे एमएफआई में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इसका फायदा कर्ज लेने वालों को मिलेगा।
  • 4. कर्ज लेने वालों को ढांचागत दिशानिर्देश उपलब्ध कराना, जिन पर अमल करते हुए व्यापार में नाकामी से बचा जा सके या समय पर उचित कदम उठाए जा सके। डिफॉल्ट के केस में बकाया पैसे की वसूली के लिए किस स्वीकार्य प्रक्रिया या दिशानिर्देशों का पालन करना है, उसे बनाने में मुद्रा मदद करेगा।
  • 5. मानकीकृत नियम-पत्र तैयार करना, जो भविष्य में सूक्ष्म व्यवसाय की रीढ़ बनेगा।
  • 6. सूक्ष्य व्यवसायों को दिए जाने वाले कर्ज के लिए गारंटी देने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम बनाएगा।
  • 7. वितरित की गई पूंजी की निगरानी, कर्ज लेने और देने की प्रक्रिया में मदद के लिए उचित तकनीक मुहैया कराएगा।
  • 8. छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों को प्रभावी ढंग से छोटे कर्ज मुहैया कराने की प्रभावी प्रणाली विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत उपयुक्त ढांचा तैयार करना।

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